बहादुर वायु सैनिकों की कहानी

bahadur vayusena ki kahani

सन 1965 के भारत-पाक युद्ध के घटना है 18 सितंबर को दो बहादुर हवाबाज संधू और ट्रैवल किलर अपने दो अन्य साथियों के साथ दुश्मन के छह विमानों का मुकाबला करने के लिए भेजे गए।

चारों भारतीय हवा बाजो के हौसले बुलंद थे भारतीय वायु सेना में पिछले 17 दिनों के हवाई युद्ध में जिस वीरता और चतुराई का परिचय दिया था उसे दुश्मन काफी घबरा गया था भारतीय वीरों की चारों और प्रशंसा होने लगी एक दिन पहले भारतीय वायुसेना के हवा बाजो ने सियालकोट क्षेत्र में अनेक टैंक नष्ट कर डाले थे तथा सरगोधा चक झुमरा चकवाल और पसरूर पर बम बरसाए थे इसके सिवा आदमपुर फिरोजपुर तथा कसूर में भी दुश्मन के विमान मार गिराए गए थे।

अब दुश्मन के विमान 44 के बजाय 66 की कतारों में आने लगे थे 18 सितंबर को भी दुश्मन के छह सेवर जेट विमान लाहौर से कसूर की ओर आ रहे थे शायद उनका इरादा भारत के फिरोजपुर नगर पर बम बरसाने का था।

इसी बीच भारत के चार नेट विमान दुश्मन के छह सेवर J2 का मुकाबला करने के लिए पहुंच गए इन चारों भारतीय विमानों के लीडर अमरजीत सिंह संधू और सब सेक्शन लीडर थे ट्रैवल किलर।

अब शत्रु के विमान दिखाई देने लगे थे वे लगभग 2200 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे थे।

संधू ने तुरंत रेडियो टेलीफोन पर ड्राइवर से कहा रेवर तुम शत्रु विमान को बम से घरों में दाहिने जा रहा हूं।

ट्रेवर अपने साथी के निर्देश पर बाएं मुड़ गया संधू दाएं मुड़ आई था कि दुश्मन का एक विमान कतार छोड़कर भाग गया।

दूसरा सेवर जेट तेजी से संधू के पीछे की ओर आने लगा संधू उसकी परवाह ना करके एक और सेवर जेट का पीछा करने का प्रयत्न करने लगा इस बीच संधू के साथी ने तीसरे सेवर जेट को उलझा रखा।

अब संधू था बीच में तथा एक शत्रु अभिमान उसके आगे था दूसरा पीछे तीनों विमानों में भागदौड़ होने लगी पिछला शत्रु विमान संधू से अभी काफी दूर था संधू अपने आगे वाले सेवर जेंट्स के काफी निकट पहुंच गया अभी से व जेठ माह की रेंज के अंदर पहुंचा ही था और सन दुगोला दागने ही वाला था कि उस शत्रु विमान ने तेजी से तिरछा गोता लगा दिया।

हाथ आए शत्रु विमान को हाथ से जाते देख संधू झुनझुना या सावधानी के साथ उसने भी रफ्तार बढ़ाई और उसी तरफ गोता लगाया शत्रु सेवर जेड फिर निकट दिखाई देने लगा संधू ने रफ्तार और बढ़ा दी उसकी वायु सेना में 11 वर्ष की शिक्षा की आज परीक्षा थी उसे दुश्मन से दो-दो हाथ करने का आज मौका मिला था वह किसी भी कीमत पर इस मौके को खोना नहीं चाहता था।

संधू रफ्तार बढ़ाता गया और जिधर शत्रु का सेवर जेड भागा था उधर ही अपना नेट बढ़ाता चला गया आखिर शत्रु का सेवर विमान संधू की मार्ग रेंज में आ ही गया लगभग 500 मीटर दूर था संधू ने फौरन बटन दबा दिया।

धड़ धड़ाम ! धड़ धड़ाम

संधू के नेट विमान ने घोड़ों की पहली बौछार छोड़ी दुश्मन भागा परंतु चंदू से बच कर कहां जाता वह भागता रहा और संधू गोले दाग तरह वह संधू के नेट विमान से केवल 300 मीटर दूर रह गया था तभी शत्रु विमान को एक गोला लगा उसमें आग लग गई।

संधू ने संतोष की सांस ली देखते ही देखते दुश्मन का सेवर विमान रावण के पुतले की तरह जलता जलता नीचे गिर गया इस विमान के गिरते ही दुश्मन के बाकी विमान भाग खड़े हुए।

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