Do Thug Bachchon Ki Nayi Hindi Kahaniya। Do Thug Ki Kahani

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Baccho Ki Kahaniya In Hindi

किसी नगर में सोमनाथ नामक जोहरी रहता था ग्राहकों से धोखा किए बिना ईमानदारी से उसने लाखों रुपए कमाए कोई ऐसा दोस्त ना था जिसकी और लोग उंगली उठा सकें जितना अधिक वह धन कमाता था इतनी उदारता से वह दान दिया करता था।

उसी नहर में दो ठग रहते थे वे वेश बदलकर आसपास के इलाके में ठगी करते थे परंतु चालाक इतने थे कि कई बार पकड़े जाने पर भी छूट जाते थे उन पर कोई अपराध साबित नहीं हो पाता था।

एक दिन उनको की नजर सोमनाथ के धन पर पड़ी बस फिर क्या था वे उसे लूटने का उपाय सोचने लगे 1 दिन उनमें से एक ठग ने ज्योतिषी का वेश धारण किया वह सोमनाथ के घर गया उसने भोजन आदि के बाद सोमनाथ का हाथ देखा और उसके जीवन की अनेक घटनाएं विस्तार से बता दी बातें सच थी फिर भी सोमनाथ को आश्चर्य नहीं हुआ उसने कहा महाराज आपने मेरे जीवन की गुजरी हुई बातें तो ठीक-ठीक बदला दी इससे पता चलता है कि आपकी दुकान और अनुभवी ज्योतिष है परंतु मैं तो तब मालूम जब आप ही है बतला दे कि मेरे जीवन में आगे क्या होने वाला है।

ज्योतिषी का वेश धारण करके आए थक ने कहा शीघ्र ही आपके घर एक सज्जन आने वाले हैं उनकी कृपा से आपका धन 10 गुना बढ़ने वाला है।

सोमनाथ ने ज्योतिषी को पुरस्कार देकर विदा करना चाहा परंतु ज्योतिषी ने पुरस्कार ग्रहण करने से इंकार कर दिया इस तरह उसने अपनी निस्वार्थ भावना की धाक जमाने की कोशिश की।

1 सप्ताह बीत गया एक दिन मूसलाधार वर्षा हो रही थी उसी समय दूसरा ठग साधु का वेश धारण करके पहले सबको अपना चेला बना कर सोमनाथ के बरामदे में आगरा हुआ उसने दरवाजा खटखटाया आवाज सुनकर सोमनाथ ने दरवाजा खोल दिया।

साधु ने सोमनाथ से पूछा जोर की वर्षा हो रही है क्या आज की रात तुम हमें अपने घर शरण दे सकते हो?

क्यों नहीं यह घर तो सज्जनों के लिए सदा खुला है फिर आप तो साधू है आइए भीतर पधारिए।

साधु अपने शिष्य के साथ अंदर चला गया सोमनाथ ने दोनों के भोजन का प्रबंध किया भोजन करने के बाद चेले ने कहा हमारे गुरुदेव सिद्ध योगीराज है। इन्होंने तपस्या के बल पर स्वर्ण योग प्राप्त कर लिया है यह चाहे तो एक स्वर्ण मुद्रा को 10 स्वर्ण मुद्राओं में बदल सकते हैं कल आपको यह चमत्कार दिखलाएंगे।

सोमनाथ ने साधु से कहा महात्मा जी आपके बारे में 1 सप्ताह पहले एक ज्योतिषी ने मेरे घर आकर सारा हाल सुनाया था आज आप स्वयं पधारे हैं बदलने हो गया हूं।

रात हुई सोमनाथ ने एक सजा धजा कमरा साधु और उसके शिष्य के लिए खोल दिया जब यह दोनों प्लंगो पर लेटे गए, तो सोमनाथ ने कहा योगीराज क्या आपके पैर दबा दूं?

साधु ने प्रभावशाली स्वर में कहा हम किसी प्राणी से सेवा नहीं कर पाते हम अपनी सेवा आप करते हैं। अच्छा शुभरात्रि कहकर सोमनाथ कमरे से बाहर आया फिर उसने दरवाजा बंद करके कुंडा लगा दिया और एक बारी ताला जड़ दिया।

आधी रात हुई ठगों ने सोमनाथ का घर लूटने की तैयारी की पर यह क्या दरवाजा तो बाहर से बंद था हार कर दो नॉट फील सज्जन बन कर लेट गए परंतु उनकी आंखों में नींद कहां भागने का कोई रास्ता ना था जितना दरवाजा मजबूत था उससे अधिक मजबूत पत्थर की दीवारें थी।

सवेरा हुआ सोमनाथ ने अपने आदमियों को भलीभांति समझा दिया कि क्या करना है कमरे का ताला खोल दिया उसने नमस्कार किया । ठग हड़बड़ा कर उठ बैठे।

स्नान करके थोड़ी देर पूजा करने के बाद सबने जलपान किया इसके बाद साधु तथा उनका चेला सोमनाथ को पिछवाड़े ले गए वहां छोटा सा मैदान था उन्होंने वहां यज्ञ शुरू कर दिया।

जब साधु कुछ मंत्र पढ़ चुका तो चेले ने सोमनाथ से कहा अब हमारे गुरुदेव स्वर्ण देव स्वर्ण योग का चमत्कार दिखाएंगे। महाशय जाइए अब आप स्वर्ण मुद्रा ले आइए।

जूही सोमनाथ घर के अंदर गया त्यों ही साधु ने 9 स्वर्ण मुद्राएं अपने झोले में से निकालकर हवन कुंड के पास जमीन में गाड़ दी।

सोमनाथ स्वर्ण मुद्रा लेकर आ गया ठगने लेकर उसे भी वही मिट्टी में गाड़ दिया। कुछ देर मंत्र पढ़ने के बाद उसने मिट्टी हटाकर खुद खुद कर 10 स्वर्ण मुद्राएं बाहर निकाल दी।

सोमनाथ ने विस्मय में का भाव दिखाया रैली निकालकर उसमें 10 मुद्राएं डालते हुए हां इस तरह तो आप मेरी 1000 स्वर्ण मुद्राओं को 10000 बना देंगे।

इतना कहकर वह थैली लेकर तेजी से घर की और लपका। ठगों ने देखा कि सोमनाथ तो उन्हें ही बेवकूफ बना गया है वे दोनों सोमनाथ पर टूट पड़े।

एकाएक सोमनाथ के आदमी जो पास ही छिपे हुए थे बाहर आए और उन्होंने दोनों ठगों को रस्सियों से जकड़ दिया।

सोमनाथ ने अपने आदमियों से कहा चलो इन्हें थाने ले चलो मैं इतना बुरा नहीं हूं जितना इन्होंने समझ लिया अब यह जेल की हवा खाएंगे और किसी भले आदमी को धोखा ना दे सकेंगे।

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