हिम्मती का ईश्वर साथी – stories for kids in hindi

एक बार एक सियार ने किसी को कहते हुए यह सब सुन लिया कि “हिम्मते मर्दा मदद ए खुदा’ इसने इसे अपना आदर्श बना लिया और हर बात में यह अपनी स्त्री सियारिन से कह दिया करता था कि हिम्मते मर्दा मदद ए खुदा। अर्थात हिम्मत ही पुरुष की मदद ईश्वर करता है।

हिम्मती का ईश्वर साथी stories for kids in hindi

कुछ दिनों के बाद सियारी ने एक गुफा में जहां सिंह ने अपने आराम के लिए घास फूस बिछा रखा था बच्चे उत्पन्न किए वहां शेर कई दिनों से नहीं आया था।

एक दिन सियार और सियारिन अपने बच्चों सहित बैठे ही थे कि इतने में सिंह दहाड़ता हुआ आया सियार ने शेर को आते देखा अपनी स्त्री सियारिन से कहा “अपने बच्चों को शीघ्र उठाकर चलो जल्दी भाग चलें” सियारिन ने कहा आज वह हिम्मते मर्दा मदद ए खुदा कहां चला गया?

सियार को बड़ी शर्म मालूम हुई उसको अचानक एक युक्ति सूझी और पैर ऊपर को उठा कर खड़ा हो गया शेर इसे देखकर हैरान था कि यह अजीब जानवर कौन है यद्यपि मैं रात दिन जंगल में ही रहता हूं और जंगल का राजा हूं पर ऐसा जंतु मैंने आज तक नहीं देखा कि इतने में सियार अपनी स्त्री सियारिन से बोला “अरी बनकुकरी ” सियारिन ने उत्तर दिया कहो सब जग के बैरी।

यह शब्द सुनकर सिंह के होश हवास उड़ गई और वह सोचने लगा कि सब जग में तो मैं भी हूं यह कोई बड़ा ही बलवान जंतु है ऐसा समझ शेर भाग खड़ा हुआ सियार के सम्मुख से सिंह को भागते देख जंगल भर के जीवो को आश्चर्य हुआ कि आज गजब हो गया कि सियारों के सम्मुख से शेर भागने लगे।

एक बंदर जो यह चित्र देख रहा था वनराज शेर के सम्मुख हाथ जोड़कर बोला महाराज यह सियार है जिसके सामने से आप भागे जाते हैं शेर ने कहा तू बिल्कुल झूठ कह रहा है क्या सियार हमने देखे नहीं सियार ऐसा नहीं होता बंदर ने कहा महाराज वह ऊपर को पैर उठाए खड़ा था आप चलिए वह अभी भाग जाएगा।

बंदर के बहुत समझाने पर शेर ने बंदर से का अच्छा तू आगे चले तो चले बंदर तो यह निश्चय से जानता ही था कि वह सियार है वह निर्भय आगे चला सियार ने जाना कि यह बंदर जान का घातक हुआ लेकिन अपने उस वाक्य को याद करके की हिम्मत ए मर्दा मदद ए खुदा फिर खड़ा हो गया जब बंदर और शेर दोनों कुछ समीप पहुंचे तब फिर सियार ने कहा तेरे बच्चे क्यों रोते हैं सियारिन ने कहा मेरे बच्चे शेर खाने को मांगते हैं।

जैसे ही शेर ने यह सुना भाग खड़ा हुआ बन्दर शेर की यह दशा देख हैरान था कि जब शेर इस सियार के सम्मुख से भागता है तो हम लोगों का कैसा गुजारा होगा अतः बंदर फिर शेर के पीछे पड़ा और हाथ जोड़कर बोला महाराज आप व्यर्थ भाग उठते हो वह निश्चय सियार है आगे चलने ही से भाग जाएगा शेर ने कहा सियार के बच्चे कहीं शेर खाने को मांगते हैं बंदर ने कहा महाराज यही तो गीदड़ भभकी है।

अत: शेर को बंदर ने बहुत समझाया तो शेर ने कहा अब की बार हम तब चलेंगे जब मेरी पूछ से तू अपनी पूछ बांध और तू आगे चल नहीं तो तू जात का बंदर बड़ा चालाक है तेरा क्या ठीक मुझे वहां मौत के मुंह में झोंक भाग खड़ा हुआ तो बंदर को कुछ भी डर तो था ही नहीं उसने वैसा ही किया और दोनों गुफा की ओर चले।

अब सियार ने इन दोनों को इस भांति आते देखा तो कहा अब के प्राण गई अब नहीं बस सकते परंतु उसे अपनी काहावत फिर याद आई की हिम्मत ए मर्दा मदद ए खुदा आता है फिर उसी भांति खड़ा हो गया और सियारिन से बोला अरी बनकुकरी सियारी ने कहा कहो सब जग के बैरी सियार ने कहा तेरे बच्चे क्यों रोते हैं सियारिन ने कहा मेरे बच्चे शेर खाने को मांगते हैं सियार ने कहा तो तू गुस्सा क्यों होती है सियारिन ने कहा इसलिए कि बंदर को भेजा था के दो शेर ले आओ प्रथम तो वह आया ही बड़ा देर में है दूसरे दो के बदले 1 ही पूछ में बांध लाया है।

शेर इतना सुनते ही बंदर की पूंछ तक उखाड़ कर भाग खड़ा हुआ सच है हिम्मती का ईश्वर साथी होता है।

शिक्षा – बहुत से मनुष्य आपत्ति आने पर कुएं में गिर पड़ते हैं जहर खा लेते हैं कोई आग लगने पर कोने में घुस पड़ते हैं कोई निकलकर रास्ता भूल प्राण दे देते हैं इतने ही शेर और भालू का नाम सुन काट के खिलौने से खड़े खड़े रह जाते हैं जिन्हें आकर वह खा भी जाते हैं कितने ही घबराए पति को के समूह 24 डाकुओं से लूट लिए जाते हैं पर एक धीर पुरुष शेर के छक्के छुड़ा देता है किसी ने ठीक कहा है आपत्ति के समय पर भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए

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