शांति की खोज में महात्मा बुध की कहानी

mahatma gautam budh ki kahani

लगभग ढाई हजार वर्ष पहले कपिलवस्तु नगर में शाक्य वंश के राजा शुद्धोधन राज्य करते थे कपिलवस्तु भारत और नेपाल के सीमा प्रदेश में स्थित था महाराज शुद्धोधन उदार और प्रजा का हित चाहने वाले थे उनकी दो रानियां थी महामाया और प्रजापति गौतमी।

दोनों बहने थी और एक दूसरे से प्रेम का व्यवहार करती थी राजा सुखी थे किंतु एक चिंता उन्हें हरदम खाए जाती थी राजा के कोई संतान नहीं थी उनके बाद राज्य कौन संभालेगा यही दुख उन्हें दिन रात सताता रहता था राजा शुद्धोधन विरुद्ध हो चुके थे जो जो समय आगे बढ़ता जाता था राजा की चिंता भी बढ़ती जाती थी।

एक रात को बड़ी रानी ने एक सपना देखा कि स्वर्ग से 4 देवता आए और उनके पलंग को उठाकर पर्वत की चोटी पर ले गए वहां एक सुंदर तालाब था 4 देवियों ने रानी महामाया को उसमें स्नान कराया और उनका श्रृंगार किया उसके बाद एक हाथी ने उन्हें एक शब्द दल कमल भेंट किया रानी ने अपना सपना राजा को सुनाया।

राजा ने ज्योतिषियों से सपने का फल पूछा ज्योतिषियों ने बताया कि शीघ्र ही राजा को पुत्र होगा इस समाचार को सुनकर सारे राज्य में हर्ष की लहर दौड़ गई कुछ समय बाद रानी महामाया अपने पिता के घर गई मार्ग में लुंबिनी नामक बाग पड़ा वहीं उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया वृद्धावस्था में राज्य के उत्तराधिकारी को पागल राजा शुद्धोधन बहुत खुश हुए पुत्र का नाम सिद्धार्थ रखा गया।

शांति की खोज हिंदी कहानियां

सिद्धार्थ के जन्म को 1 सप्ताह बिना भी सका था कि महामाया का स्वर्गवास हो गया अतः शिशु का पालन पोषण महामाया की छोटी बहन प्रजापति गौतमी ने किया इसीलिए सिद्धार्थ गौतम कहलाए बड़े होने पर उनकी शिक्षा का उचित प्रबंध किया गया।

बचपन से ही सिद्धार्थ गंभीर स्वभाव वाले और एकांत प्रिय थे वह प्राय अकेले में बैठकर कुछ सोचते रहते थे उन्हें राजमहल के सुखों और वैभव में कोई रुचि ना थी महाराज गौतम के इस प्रकार के व्यवहार को देखकर चिंतित हुए उन्होंने यशोधरा नामक एक सुंदर राजकुमारी के साथ गौतम का विवाह कर दिया पर गौतम का मन सांसारिक बंधनों में नहीं बन सका।

एक दिन गौतम रथ पर बैठकर भ्रमण के लिए महल से निकले मार्ग में उन्होंने एक मनुष्य को देखा जिसकी कमर झुकी हुई थी उसके बाल सफेद थे और चेहरे पर झुरिया पड़ी हुई थी वह लाठी के सहारे चल रहा था राजकुमार ने सारथी छंदक से पूछा यह कैसा मनुष्य है? सारथी ने उत्तर दिया यह विरोध है वृद्धावस्था के कारण इसकी यह दशा हो गई है।

एक दिन हमारी भी यही दशा होनी है राजकुमार का मन खिन्न हो गया उसने सारथी को वापस चलने की आज्ञा दी।

कुछ दिन बाद फिर नगर भ्रमण के लिए निकले इस बार मार्ग में उन्हें एक रोगी मिला वह दुख से करा रहा था उसका शरीर बहुत निर्बल हो गया था उसकी दशा देखकर भी गौतम का मन दुख से भर गया उस दिन भी वे भ्रमण के लिए ना जा सके।

एक अन्य दिन वह फिर नगर भ्रमण के लिए निकले एक बार उन्होंने कुछ मनुष्य को कंधे पर अर्थी ले जाते हुए देखा अर्थी के पीछे कुछ रोते फिरते जा रहे थे गौतम ने सारथी से उसके विषय में पूछा चंदक ने मानव जीवन की चार अवस्थाएं बता कर कहा।

बाल्यावस्था युवावस्था और वृद्धावस्था के बाद एक दिन सब की यही दशा होती है यह मरण दशा है संसार के सुख भोग छोड़ कर सबको एक दिन यहां से विदा होना ही पड़ता है जन्म लेने वाले की मृत्यु भी निश्चित है।यह सुनकर राजकुमार उदास हो गए और वापस लौट आए अब तो दिन रात गौतम चिंता में डूबे रहते थे संसार में शांति कैसे हो सकती है कष्टों से छुटकारा कैसे मिल सकता है यही प्रश्न उनके दिमाग में चक्कर काटते रहते थे।

1 दिन गौतम ने एक सन्यासी को देखा उसके मुख पर एक विचित्र तेज था वह संसार के माया मोह से मुक्त हो चुका था गौतम ने भी संसार को त्यागने का निश्चय कर लिया कुछ समय बाद यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया उसका नाम राहुल रखा गया।

एक रात को गौतम के मन में विचार आया कि यह राहुल संसार के बंधनों में बांधने के लिए मेरे पैरों में जंजीर है मुझे यह मोह की बेड़ियां शीघ्र तोड़नी होगी गौतम तत्काल उठ खड़े हुए सारथी चमक को साथ लेकर वह महल से चल दिए सवेरा होते होते वे नगर से बहुत दूर जा पहुंचे।

गौतम ने अपने आभूषण और राजसी वस्त्र उतारकर चमक को दिए और उसे राजमहल की ओर लौटा दिया।

गौतम स्वयं शांति की खोज में 1 की ओर चल दिए गया के पास बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बुध के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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