राजकुमारी और चांदी की टोकरी की कहानी

Rajkumari Ki Kahaniyan Hindi

एक था राजा उसका नाम था चित्रसेन उसका महल गोदावरी के किनारे था महल में कई नौकर नौकरानी आधे नौकरों में एक का नाम था गोविंद वह राजकुमारी की सेवा किया करता था।

राजकुमारी का नाम था नंदिनी वह जितनी सुंदर थी उतनी ही मुंह जोर थी।

1 दिन की बात है प्रातः काल का समय था नंदिनी महल के साथ लगे हुए बाग में से फूल तोड़ने गई गोविंद भी उसके साथ था राजकुमारी नंदिनी ने बाएं हाथ में चांदी की टोकरी पकड़ी हुई थी दाएं हाथ से वह फूल चुन चुन कर टोकरी में रखती जा रही थी।

जब टोकरी फूलों से भर गई तो राजकुमारी महल की ओर चल पड़ी गोविंद उसके साथ-साथ चला।

मार्ग में उन्हें एक सफेद तथा लंबी दाढ़ी वाला ब्रिज दिखाई दिया उस वृत्त के सिर पर लंबी-लंबी चटाई थी उस वृद्ध के चारों और बहुत से लोग जमा हो गए थे।

नंदिनी ने गोविंद से कहा जाकर पता करो कि है वृद्ध कौन है और लोग इसके इर्द-गिर्द क्यों जमा है।

गोविंद चला गया और कुछ ही देर में पता करके वापस आया कहने लगा वह गरीब एक बड़ा ज्योतिषी है वह किसी को भी बतला सकता है कि उसका विवाह किससे होगा।

राजकुमारी चकित हुई उसने कहा गोविंद जाओ उसी से पूछ कर आओ मेरा विवाह किससे होगा?

गोविंद चला गया और कुछ मिनट बाद वापस आकर नीचे मुंह करके खड़ा हो गया।

नंदिनी ने पूछा क्यों क्या हुआ ज्योतिष महाराज ने क्या कहा?

गोविंद ने डरते डरते कहा ज्योतिषी ने ऐसी बुरी बात बताई है कि मैं आपके सामने कह नहीं सकता।

राजकुमारी ने कुरूद होकर कहा तुम्हें बतानी होगी गोविंद बोला ज्योतिषी ने ऐसी बात कही है कि मैं उसे जबान पर नहीं ला सकता।

नंदिनी का पारा चढ़ गया क्या नहीं लगी तुम्हें बताना होगा कि उसने क्या कहा यह मेरी आज्ञा है।

गोविंद ने कहा आपकी आज्ञा है तो बताता हूं ज्योतिषी ने कहा कि आपका विवाह मुझसे होगा यानी राजकुमारी नंदिनी का विवाह गोविंद से।

बदतमीज नंदनी को गुस्सा आ गया मुझसे ऐसी बात कहने का तुझे साहस कैसे?

इतना कहते-कहते राजकुमारी ने फूलों से भरी चांदी की टोकरी गोविंद के माथे पर दे मारी फिर वह मुंह फेर कर पैर पटकने हुई राज महल को चली गई।

चांदी की टोकरी माथे के साथ टकराने से गोविंद के मस्तक पर घाव हो गया और वह लहू बहने लगा उसे भी गुस्सा आ गया उसने कहा राजकुमारी होगी तो अपने घर की होगी मन में इतना कहकर वह अपना सामान बांध कर दूसरे देश की ओर चल पड़ा।

कई दिन पैदल चलने के बाद गोविंद एक पड़ोस के नगर में जा पहुंचा वहां उसने एक सेठ के यहां नौकरी कर ली। उसके परिश्रम और इमानदारी से खुश होकर सेठ ने उसे अपना सहायक बना लिया था कुछ दिन बाद वहां के राजा का स्वर्गवास हो गया नीति के अनुसार लोग नया राजा चुनने के लिए एकत्र तक हुए बहुत से राजकुमार और धनी साहूकार वहां आए।

थोड़ी देर में बैंड बाजों के साथ बादशाही हाथी वहां आया वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा उसने एक एक करके सभी राजकुमारों और साहूकारों को देखा परंतु है रुका नहीं वह बढ़ता बढ़ता गोविंद के पास आकर रुक गया उसने पुष्पमाला गोविंद के गले में पहना दी लोग ने राजा की जय जय कार कर उठे।

गोविंद को देश में वस्त्र तथा हीरे जवाहरात से जुड़े गहने पहनाए गए फिर बाजे गाजे के साथ उसका जुलूस निकाला गया उसके जयघोष से धरती आकाश गूंज उठे।

राज गद्दी पर बैठते ही गोविंद ने अच्छा शासन चलाया वह दयालु तथा अन्याय कार्य राजा साबित हुआ उसका यह चारों और फैलने लगा।

राजा चित्रसेन ने जब महाराज गोविंद का इतना यह सुना तो धूमधाम से गोविंद से अपनी पुत्री नंदिनी का विवाह कर दिया।

महाराज गोविंद नंदिनी की डोली लेकर अपने महल में पहुंचे रात को जब दोनों आमने-सामने बैठे तो नंदिनी ने पूछा आपके माथे पर यह चोट का निशान कैसा है।

गोविंद ने कहा यह निशान मेरे अच्छे भाग्य का सीन है इसीलिए मुझे महाराज बनाया और इसी ने तुम्हारा पति।

नंदिनी ने चकित होकर का क्या पहेलियां बुझा रहे हैं साफ-साफ कहिए ना यह चोट आपको कहां लगी?

गोविंद ने कहा अच्छी बात है तुम जरा ठहरो मैं अभी सारी बात बताता हूं।

इतना कहकर गोविंद चला गया थोड़ी देर बाद गोविंद ने आकर कहा याद करो ही है क्या इतना कहकर उसने नंदनी को चांदी की टोकरी दिखलाई।

टोकरी देखकर पहले दोनों ने कुछ उलझन में पड़ गई फिर एक आकर उसे याद आ गई की है टोकरी उसी की थी।

उसने कहा हो यह टोकरी तो मेरी है।

नंदिनी ने गोविंद की ओर ध्यान से देखा दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया।

ये राजकुमारी की कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में बताइये

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